Hindi Diwas 2019: 14 September को हम ‘हिंदी दिवस, Hindi Day’ के रूप क्यों मनाते है, सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

Hindi Diwas Jankari in Hindi | Short Essay on Hindi Diwas in Hindi Language

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Hindi Diwas 2019:  दोस्तों सबसे पहले आप  सभी देशवाशियों को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाये। देश हमारा आजाद 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था और उस समय अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी भाषा की बहुत अनदेखी हो रही थी। इस को देखते हुए भारत सरकार ने 14 सितम्बर 1949 को सभा में एक मत से हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया था। इसी के बाद हर भारतीय हर साल 14 सितम्बर को ‘Hindi Diwas हिंदी दिवस’ के रूप मनाया जाने लगा। आइये नीचे हम हिंदी दिवस के बारे में विस्तार पूर्वक जानते है।

14 सितम्बर हिंदी दिवस :- क्यों मनाया जाता हैं?

Hindi Diwas 2019: 14 September को हम 'हिंदी दिवस, Hindi Day' के रूप क्यों मनाते है, सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में
Hindi Diwas 2019: 14 September को हम ‘हिंदी दिवस, Hindi Day’ के रूप क्यों मनाते है, सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

हमारा देश विविधताओ के कारण भी अपनी पहचान रखता है,यहाँ विभिन्न प्रान्तों और उसकी वेश-भूषा,व्यंजन ,भाषा और बोली,भौगोलिक स्थिति आदि विविधता अपने आप में अनोखी और रोचक है।

देवनागरी लिपी भारत की ही देन है, जो समस्त भाषाओँ की जननी मानी जाती है। हालांकि भारत की प्राचीनतम भाषा संस्कृत को माना जाता हैं। भाषा किसी भी देश की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हिंदी और हिंदी से जुडी बोलिया सम्पूर्ण देश में बोली जाती हैं। हिंदी भारत की राजभाषा है, सम्पूर्ण भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली और समझने वाली भाषा है, हिंदी में संस्कृत के तत्सम और तदभव शब्दों का प्रयोग अधिक होता है।

हिंदी भारत की संवैधानिक रूप से राजभाषा है। हालांकि हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा का दर्जा अभी तक प्राप्त नहीं हुआ हैं। हिंदी भारत में तथा दुसरे देशो में भी सम्पर्क भाषा का काम करती हैं।सरल रूप से समझे जाने वाली भाषा हिंदी भारत के कई राज्यों की अधिकारिक भाषा हैं।

हिंदी को भारत की आजादी के दो साल बाद 1949 को आधिकारिक रूप से राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ। 14 सितम्बर 1953 से प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को पुरे भारत में हिंदी दिवस मनाया जाने लगा। दुनिया भर में इसका प्रचार-प्रसार किया जाने लगा। पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ।  इस सम्मेलन में ३० देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

हिंदी के अन्य नाम या रूप ( विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में विभिन्न संदर्भो में प्रयुक्त हुए)

  • आर्याभाषा
  • खड़ीबोली
  • हिन्दुस्तानी
  • भारती
  • देशी
  • भाखा
  • देशनावचन (विधापति )
  • हिन्दवी
  • दक्खिनी
  • रेखता
  • विश्वी
  • नागरी

लिपि
हिंदी को देवनागरी लिपि में लिखा जाता हैं। इसे बायीं से दाई ओर लिखा जाता हैं। इसे नागरी भी कहते है।

हिंदी दिवस का इतिहास

हिंदी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ।
हिंदी का क्षेत्र विशाल है तथा हिंदी की उपभाषा यानि बोलिया अनेक हैं।

हिंदी साहित्य सम्मेलन में  गाँधी जी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने पर जोर दिया। हिंदी को महात्मा गाँधी जनमानस की भाषा कहते थे।

14 सितम्बर को काफी विचार विमर्श के बाद हिंदी को राजभाषा के तौर पर चुना गया इसीलिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु हिंदी की महत्ता को देखते हुए यह फैसला लिया की हिंदी दिवस के लिए यही दिन उत्तम माना गया है।

यही कारण है की 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

हिंदी दिवस से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • 1950 में हिंदी को भारत की अधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त हुआ।
  • भारत देश के बाहर भी कई ऐसे देश है जहाँ हिंदी बोली और समझी जाती है।
  • हिंदी राजभाषा है किन्तु यह दुखद है की अब तक उसे राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त नही है।
  • इंटरनेट पर 94% हिंदी की लोकप्रियता बढ़ी है।
  • बिहार पहला राज्य है जिसने हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा बनाई।
  • हिंदी साहित्य सम्मेलन वर्ष 1918 में गाँधी जी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था।
  • गाँधी जी हिंदी को जनमानस की भाषा भी कहते थे।
  • पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ।
  • 14 सितम्बर को हिंदी को राजभाषा के तौर पर चुना गया। इसलिए 14 सितम्बर को हिंदी दिवस  के रूप में मनाया जाता हैं।
  • साल 1930 में पहला हिंदी टाइपराइटर अस्तित्व में आया।
  • हिंदी का पहला अखबार ‘उदन्त मत्र्तन्द है।
  • हिंदी भाषा की रचना के लिए पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार 1968 में सुमित्रानंदन पन्त को दिया गया।
  • सयुक्त राष्ट्र संघ में पहली बार भाषण 1977 में तत्कालीन विदेशमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपयी ने दिया।
  • देश का पहला राष्ट्रीय हिंदी संग्रहालय आगरा में स्थापित करने की योजना है।
  • 2003 में इंजीनियर आलोक कुमार ने हिंदी में पहला ब्लॉग ‘नौ दो ग्यारह’ शुरू किया।
  • पहला विश्व हिंदी सम्मेलन में 30  देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • हिंदी में पहली इंटरनेट पत्रिका न्यूजीलैंड से ‘भारत-दर्शन’ प्रकाशित हुई।

हिंदी दिवस कार्यक्रम

हिंदी दिवस के के दिन हिंदी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान भाषण, विचार गोष्ठी, निबंध लेखन, कवि सम्मेलन, पुरस्कार समारोह ,लेखन प्रतियोगिता आदि कई प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन होता है ,ये सब हिंदी भाषा में ही होता है, हिंदी को कुछ दिन और याद रखे इसके लिए राजभाषा सप्ताह का भी आयोजन होता है। जो एक सप्ताह तक चलता है। इसके सम्मान स्वरूप एक लाख एक हजार रूपये की धनराशी दिए जाते है।

Hindi Day हिंदी दिवस मनाने का  कारण

हिंदी की स्थिति आज भविष्य में विलुप्त होने जैसी ही है। हिंदी की जगह अंग्रेजी बहुत तेजी से ले रही है। हालत तो इसे है की सोशल मीडिया पर लोग हिंदी दिवस की शुभकामनाये भी अंग्रेजी में देते है। इसे विडंबना ही कहेंगे की योग दिवस को 177 देश अपना समर्थन देते है किन्तु हिंदी भाषा को मात्र 129 देश का ही समर्थन प्राप्त है।

यह कहना गलत नही होगा की हिंदी अपने ही घर पर दासी के वेश में रहती है। बस हिंदी के जानकर या विद्वान् अपना कर्तव्य बोध के कारण अन्य लोगो को उनके कर्तव्य का बोध कराते हुए हिंदी दिवस माना कर हिंदी भाषा को विलुप्त होने से बचाने की पूरी कोशिश कर रहे है।

हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य 

जैसा की हम सब जानते है की हिंदी अपने बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। कुछ चुनिन्दा लोगो के कोशिश से इसे हमेशा नही बचाया जा सकता।

  • हिंदी भाषा को विलुप्त होने से बचाने  के लिए इसे अपनाना होगा। इसे भी वही  सम्मान देना होगा, क्योंकि हिंदी से ही हम हिन्दुस्तानी है।
  • हिंदी हमारी सिर्फ राजभाषा नही, हमारी मातृभाषा भी है। और मातृभूमि मातृभाषा दोनों ही प्राणों से प्यारा होता है।
  • यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण था जब संविधान सभा देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी भाषा को अपने राष्ट्र की अधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया।
  • अंग्रेजी और हिंदी के बीच जो फर्क है जो खायी है उसे देखने का पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण बदलने का समय है।
  • हमे अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अपनी संस्कृति के महत्व पर जोर देने का समय है।
  • हम सबको एक साथ आना चाहिए इस फर्क को मिटने के लिए नही तो वह समय दूर नहीं जब हम अपनी पहचान भी खो देंगे।

सभी देशवाशियों को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाये। देश की स्वतंत्रता के इतने वर्षो बाद भी हिंदी को वह स्थान नही प्राप्त हो सका जिसकी वः अधिकारी है। हिंदी दिवस कार्यक्रम के नाम पर इसके आयोजन पर  हिंदी के प्रचार-प्रसार के नाम पर करोडो रूपये खर्च कर दिए जाते हैं। पर  हम परिणाम में यह देखते है की ढाक के तीन पात